उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और सुधार की आवश्यकता भविष्य निर्माण में ,

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वर्तमान में सामाजिक मानविकी , मीडिया शोध में अच्छे ज्ञान और समझ के लिए अकादमिक में उच्च शिक्षा गुणवत्ता और शोध में सुधार की नितांत आवश्यकता है मुझे ऐसा लगता है कि उच्च शिक्षा के प्रोग्राम के तहत दिया जाने वाला फण्ड कुछ समय के लिए वर्कशाप, सेमिनार और कांफ्रेंस कर लेने से क्या शिक्षा व्यवस्था सुधर जाएगी ऐसा माना जाता है पर इस तरह के कार्यक्रम प्रतिदिन के प्रेरणा की तरह होना चाहिए भारत की शिक्षा व्यवस्था में ऐसे कार्यक्रमो में कई बार तो कुछ ऐसे बेहूदे अनर्गल भाषण देकर चले जाते है और भारत के शिक्षक भी खाना पूर्ति करना सीख गए है सवाल यह है कि आखिर शिक्षा का भविष्य निर्माण करने वाले ही ऐसे होंगे तो कैसे शिक्षा व्यवस्था सुधरेगी प्रायः भाषण देना भी कला है पीपीटी प्रस्तुति भाषण की अच्छी कला मानी जाती है पर आज भी बहुत से शिक्षा संस्थान इसे अपनाने तैयार नहीं है वही पुराने ढंग की शिक्षा व्यवस्था आखिर कब तक थोपी जायेगी यह भविष्य निर्माण में खतरे की निशानी है न की उज्ज्वल भविष्य निर्माण, और वार्तालाप पर आज भी फ़ीस , उच्च शिक्षा के लिए सीट वृद्धि , छात्रावास सुविधा, छात्रावास में उच्च शिक्षा में सम्मान और अस्मिता के तौर अलग अलग बिल्डिंग निर्माण एवं शोध छात्रावास में वार्तानुकूलित सुविधाओं का विशेष ध्यान , समय पर छात्रवृति मिलना, तमाम सवाल आज ज्यो के त्यों आखिर क्यों बने हुए है शिक्षा की स्थिति चिंतनीय बन गयी है भारत में विडम्बना है कि उच्च शिक्षा शोध में गुणवत्ता नहीं है अन्य देशों की अपेक्षा , इसके लिए हमे कुछ सार्थक प्रयास करने होंगे जिसमें छात्रावास में पूर्ण सुविधा, सिलेवस परिवर्तन नये ढंग का , कम्प्यूटर तकनीकी ज्ञान और शोध , स्टूडेंट में शिक्षा गुणवत्त्ता हेतु ज्ञान मीमांसा में यह विचार योग्य है Reported by Neha Nema Phd महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविधालय वर्धा

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