डोकलाम विवाद के बाद सेना हुई सजग, बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर तेज करने पर जोर

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सरहद पर चीन के साथ डोकलाम विवाद के बाद पहली बार दिल्ली में आर्मी कमांडर्स की मीटिंग के दौरान सेना प्रमुख जनरल बिपिन ने कहा कि भारतीय सेना को हर समय किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए. बैठक के दौरान सेना प्रमुख जनरल रावत ने कहा, “बॉर्डर के आस-पास रोड बनाने का काम तेजी से चल रहा है. खासकर बॉर्डर पर इंफ्रास्ट्रक्चर के काम को तेजी से बढ़ाया जा रहा है. इसके लिए बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन यानी बीआरओ को ज्यादा पैसा जारी किया गया है, ताकि इसे समय रहते ही पूरा किया जा सके.” जनरल रावत ने कहा, “इसके साथ ही 2020 तक सेंट्रल सेक्टर में चार पास तैयार करने का काम पर जोर दिया जा रहा है. यह पास नीती, थांगला वन, लिपुलेख और त्सांगचोकला हैं. ये चारों अहम पास हिमाचल और उत्तराखंड में हैं और चीन की सीमा के पास हैं.” पिछले 15 सालों में कुल 73 में से अब तक सिर्फ 27 स्ट्रैटेजिक ऑल-वेदर रोड का निर्माण हो पाया है. यानी कुल 4,643 में से अब तक सिर्फ 963 किलोमीटर काम हुआ है. इसके अलावा, लंबे समय से प्रस्तावित पश्चिमी और पूर्वी मोर्चों पर 14 रणनीतिक रेलवे लाइनों का निर्माण अभी तक यहां शुरू नहीं हुआ है. जनरल रावत ने आगे बताया, “सीमा पर भारत का इन्फ्रास्ट्रक्चर खराब होने की वजह से ही आज चीन ने वहां रेल, हाईवे, मेटल-टॉर रोड, एयरबेस और कई तरह के इन्फ्रास्ट्रक्चर का जाल बिछा दिया है. इसके अलावा पूरे तिब्बत में चीन ने जबरदस्त इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर दिया है. तिब्बत पर कब्जा करने के बाद चीन ने करीब 30 डिवीजन में पांच से छह ‘रैपिड रिएक्शन फोर्सेस’ को भी तैनात किया गया है.” भारत की सीमा चीन के साथ 4,057 किमी लंबी है. इस सीमा पर सड़क समेत कई इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम कई सालों से रुका पड़ा है. यही कारण है कि इसका फायदा उठाते हुए चीन सीमा पर अपनी हलचल करते हुए अक्सर दिखाई देता हुए.

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