क्या है जेटली का चुनावी बॉन्ड, 13 बातों से जानिए इस खास स्कीम को

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राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार एक खास किस्म का इलेक्टोरल बॉन्ड ला रही है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के लिए एक खास किस्म के बांड की घोषणा की. लोकसभा में मंगलवार को इसके बारे में बताते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि चुनावी बांड को अंतिम रूप दे दिया गया है और इस व्यवस्था के आरंभ होने से देश में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की पूरी प्रक्रिया में काफी हद तक पारदर्शिता आएगी. वित्त वर्ष 2017-18 के बजट के दौरान जेटली ने चुनावी बांड शुरू करने की घोषणा की थी. जेटली ने कहा कि हमने आम बजट के दौरान चुनावी बांड शुरू करने का ऐलान किया था. लोकसभा में तीन तलाक पर भाषण दे रहे थे ओवैसी, किसी ने कह दिया ‘पागल’ दान को लेकर राजनीतिक दलों में पारदर्शिता लाने के लिहाज से इसे सरकार की ओर से बड़ा कदम बताया जा रहा है. देखने वाली बात होगी कि इस स्कीम में सरकार को कितनी कामयाबी मिलती है. फिलहाल बॉन्ड से जुड़ी 13 बातों को जानते हैं जो हर किसी के लिए बेहद जरूरी है. चुनावी बॉन्ड 1 हजार, 10 हजार, 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ रुपये के मूल्य में उपलब्ध होंगे. भारतीय स्टेट बैंक की कुछ चुनिंदा बैंक शाखाओं से ही बॉन्ड खरीदा जा सकेगा. भारतीय नागरिक या देश में काम करने वाली संस्था ही इसे खरीद सकेंगी. बॉन्ड खरीदने के लिए केवाईसी फॉर्म यानी नो योर कस्टमर (ग्राहक को जानिए) भरना होगा. बॉन्ड देने वाले का नाम जाहिर नहीं किया जाएगा. बॉन्ड खरीदने वाले का नाम जाहिर नहीं होगा, लेकिन उसके बैंक खाते में इसकी जानकारी रहेगी. सती प्रथा की तरह तीन तलाक के गवाह बनने वाले मौलवियों पर भी हो केस: मीनाक्षी लेखी चुनावी बॉन्ड की मियाद महज 15 दिन के लिए होगी, जिसे राजनीतिक दलों को दान किया जा सकेगा. बॉन्ड्स उन्हीं राजनीतिक दलों को दिया जा सकेगा जो रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट 1951 के धारा 29A के तहत रजिस्टर्ड होंगे. बॉन्ड की सुविधा ऐसे राजनीतिक दलों को ही मिलेगी जिन्होंने पिछले आम चुनाव या किसी विधानसभा चुनाव में एक फीसदी से ज्यादा मत हासिल किया हो. बॉन्ड को खरीद जाने के महज 15 दिनों के अंदर राजनीतिक दलों को केवल अधिकृत बैंक खाते के जरिए भुनाना होगा. इस बैंक खाता की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी. इसे किसी जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीने में 10 दिनों के अंदर खरीदा जा सकेगा. आम चुनाव वाले साल में बॉन्ड खरीदने के लिए 30 दिन अतिरिक्त मिलेगा. हर राजनीतिक दल को चुनाव आयोग को बताना होगा कि उसे इस बॉन्ड्स के जरिए कितनी राशि मिली.

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