लीक की खबर के बाद UIDAI का एक्शन, बाबुओं को भी नहीं दी आधार डाटा एक्सेस

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आधार कार्ड से जुड़ी जानकारी चोरी होने की खबर सामने आने के बाद आधार अथॉरिटी UIDAI ने तुरंत एक्शन ले लिया था. आधार अथॉरिटी ने अखबार में आधार डाटा चोरी होने की खबर आते ही डाटा तक पहुंच का अध‍िकार रखने वाले अध‍िकारियों को इससे रोक दिया. रिपोर्ट के मुताबिक कुल ऐसे 5 हजार अध‍िकारियों की आधार डाटा तक पहुंच रोक दी गई. दरअसल 4 जनवरी को ऐसी रिपोर्ट आई थी कि महज 500 रुपये में करोड़ों आधार की डिटेल मिल रही है. इस खबर के सामने आते ही UIDAI ने सुरक्षात्मक उपाय किए. इसके तहत उसने उन सभी निजी और सरकारी अध‍िकारियों को आधार डाटा एक्सेस करने से रोक दिया, जिन्हें सीमित एक्सेस दी गई थी. इकोनॉमिक टाइम्स ने एक सरकारी अध‍िकारी के हवाले से यह बात कही है. दरअसल इससे पहले UIDAI ने कुछ अध‍िकारियों को आधार डाटा के लिए सीमि‍त एक्सेस दी हुई थी. इसके तहत संबंध‍ित अध‍िकारी सिर्फ आधार से जुड़ी डेमोग्राफिक डिटेल ही देख सकता था. उसे आधार होल्डर का नाम, पता, जन्मतारीख व अन्य जानकारी तक ही एक्सेस होती थी. इसके लिए उसे सिर्फ 12 अंकों का आधार कार्ड नंबर एंटर करना पड़ता था. अधि‍कारी ने बताया कि इसके बाद UIDAI ने व्यवस्था में बदलाव किया और एक्सेस फिंगरप्र‍िंट देने के बाद ही मिलती है. इसकी वजह से लोगों को आधार डिटेल अपडेट में होने में जरूर समय लग रहा होगा, लेकिन यह डाटा लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए अहम है. UIDAI ने सफाई दी है कि आधार डाटा सुरक्ष‍ित है और उसके सिस्टम में कोई खराबी नहीं है. उसने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज करवा दी है. विवाद के बाद UIDAI की ओर से दिल्ली पुलिस में खबर करने वाली पत्रकार रचना खेड़ा पर एफआईआर दर्ज करने की खबरें भी आई थीं. हालांकि, इस मामले में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार मीडिया की आज़ादी के पक्ष में है, जो एफआईआर दर्ज की गई है वह अज्ञात व्यक्ति के नाम पर दर्ज की गई है. इससे पहले आधार अथॉरिटी UIDAI ने आधार डाटा लीक होने की आशंका से इनकार किया था. अथॉरिटी ने मीडिया रिपोर्ट को खारिज किया था और कहा था कि रिपोर्ट में तत्थ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है. अथॉरिटी ने एक बार फिर भरोसा दिलाया कि आधार डिटेल सुरक्षित है और किसी भी तरह का डाटा लीक नहीं हुआ है. मिले 100 करोड़ आधार की डिटेल अंग्रेजी अखबार द ट्रिब्यून ने एक रिपोर्ट छापी थी. इसमें दावा किया जा रहा था कि उन्होंने एक व्हाट्सऐप ग्रुप से मात्र 500 रुपये देकर सर्विस खरीदी और 100 करोड़ आधार कार्ड की डिटेल पर उन्हें एक्सेस मिल गया. सिर्फ शेयर होता है आधार नंबर इस पर सफाई जारी करते हुए UIDAI ने गुरुवार को एक बयान जारी क‍िया. इसमें उन्होंने बताया कि आधार की ये सुविधा श‍िकायतों के निवारण के लिए सिर्फ कुछ संबंधित अध‍िकारियों और राज्य सरकार के अध‍िकारियों को दी गई है. ये लोग सिर्फ आधार नंबर डालकर आधार से जुड़ी शंकाओं को दूर करने का काम करते हैं. आधार कार्ड की सुरक्षा को लेकर अंग्रेजी अखबार ‘द ट्रिब्यून’ की एक खबर ने पूरी तरह से तहलका मचा दिया है. इस खबर को करने वाली पत्रकार रचना खेड़ा पर एफआईआर दर्ज हुई, जिसके बाद सरकार को भी सफाई देनी पड़ी. अब इस मामले में इंटरनेट की दुनिया में अपने खुलासों से सभी को चौंकाने वाले कंप्यूटर प्रोफेशनल एडवर्ड स्नोडेन ने भी अखबार की इस रिपोर्ट का समर्थन किया है. एडवर्ड स्नोडेन ने ट्वीट किया कि जिन पत्रकारों ने आधार लीक मामले को उजागर किया है वह अवॉर्ड के हकदार हैं, किसी जांच के नहीं. अगर सरकार इस मामले में सही में न्याय के लिए चिंताजनक है तो उन्हें अपनी आधार को लेकर नीतियों में सुधार करना चाहिए, जिन्होंने करोड़ों लोगों की निजता को खतरे में डाला है. उन्होंने लिखा कि अगर किसी को गिरफ्तार करना ही है तो वे UIDAI ही है. Edward Snowden ✔ @Snowden The journalists exposing the #Aadhaar breach deserve an award, not an investigation. If the government were truly concerned for justice, they would be reforming the policies that destroyed the privacy of a billion Indians. Want to arrest those responsible? They are called @UIDAI. https://twitter.com/rahulkanwal/status/949847121884262401 … 3:42 AM – Jan 9, 2018 90 90 Replies 2,156 2,156 Retweets 2,280 2,280 likes Twitter Ads info and privacy आपको बता दें कि इससे पहले भी स्नोडेन ने आधार को लेकर चिंता व्यक्त की थी. उन्होंने लिखा था कि भारत में आधार का गलत इस्तेमाल हो सकता है. Edward Snowden ✔ @Snowden It is the natural tendency of government to desire perfect records of private lives. History shows that no matter the laws, the result is abuse. https://twitter.com/zackwhittaker/status/948999538731311105 … 4:50 AM – Jan 5, 2018 147 147 Replies 4,211 4,211 Retweets 5,205 5,205 likes Twitter Ads info and privacy गौरतलब है कि अंग्रेजी अखबार ‘द ट्रिब्यून’ की रिपोर्टर रचना खेड़ा ने अपनी रिपोर्ट में यह उजागर किया था कि किस तरह चंद रुपयों के लिए करोड़ों आधार कार्ड की जानकारी को बेचा जा रहा है. इस खबर के बाद से ही लगातार आधार की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे थे. यूआईडीएआई की ओर से अखबार और रिपोर्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की आलोचना की जा रही थी. आधार डाटा लीक केस: सरकार बोली- पत्रकार नहीं, अज्ञात व्यक्ति पर हुई है FIR रविशंकर ने क्या किया ट्वीट कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस मामले में सोमवार को ट्वीट कर सफाई दी. उन्होंने ट्वीट किया कि सरकार प्रेस की आजादी के लिए तत्पर है और आधार की सुरक्षा पर भी नज़र बनाए हुए है. जो एफआईआर दर्ज की गई है, वह अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ है. हमने UIDAI को कहा है कि वह अखबार ट्रिब्यून से और रिपोर्टर से खबर से जुड़े सभी तथ्य हासिल करे. और अधिकारियों की जांच करें. Ravi Shankar Prasad ✔ @rsprasad Govt. is fully committed to freedom of Press as well as to maintaining security & sanctity of #Aadhaar for India’s development. FIR is against unknown. I’ve suggested @UIDAI to request Tribune & it’s journalist to give all assistance to police in investigating real offenders. 1:30 PM – Jan 8, 2018 263 263 Replies 822 822 Retweets 2,253 2,253 likes Twitter Ads info and privacy क्या था रिपोर्ट में? पत्रकार रचना खेड़ा की ओर ‘द ट्रिब्यून’ ने दावा किया था कि उसने एक व्हाट्सएप ग्रुप से मात्र 500 रुपए में आधार का डाटा हासिल करने वाली सर्विस खरीदी और उनको करीब 100 करोड़ आधार कार्ड का एक्सेस मिल गया. अखबार ने कहा कि इस दौरान उनको लोगों के नाम, पता, पिन कोड, फोटो, फोन नंबर और ईमेल आईडी की जानकारी मिली थी. अखबार के मुताबिक उनकी तहकीकात में उन्हें एक एजेंट के बारे में पता लगा. जिसके बाद एजेंट ने केवल 10 मिनट में ही एक गेटवे दे दिया और लॉग-इन पासवर्ड दिया. उसके बाद उन्हें सिर्फ आधार कार्ड का नंबर डालना था और किसी भी व्यक्ति के बारे निजी जानकारी आसानी से मिल गई. इसके बाद 300 रुपये अधिक देने पर उन्हें उस आधार कार्ड की जानकारी को प्रिंट करवाने का भी एक्सेस मिल गया. इसके लिए अलग से एक सॉफ्टवेयर था. अखबार ने कहा कि इस दौरान उनको लोगों के नाम, पता, पिन कोड, फोटो, फोन नंबर और ईमेल आईडी की जानकारी मिली थी. कौन हैं स्नोडेन ? अपने खुलासों से सबको चौंकाने वाले एडवर्ड स्नोडेन मास्को में रहते हैं. वो अमेरिकी एनएसए के लिए काम कर चुके हैं. फेमस कंप्‍यूटर प्रोफेशनल स्नोडेन को एनएसए संबंधित गुप्त जानकारी लीक करने के आरोपों के बीच अमरीका से पलायन कर गए थे. उन्हें अमेरिका ने भगोड़ा घोषित किया हुआ है.

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