जान बचानी है तो गंगा में मत नहाएं, अब नहीं धुलते पाप

0
34

गंगा नदी से देश के करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है, हिंदू धर्म में गंगा को सबसे पवित्र नदी माना जाता है. लेकिन अब गंगा पवित्र नहीं रही क्योंकि गंगा नदी में सीवेज के जरिए डाला जाने वाला मल-मूत्र इसे काफी नुकसान पहुंचा रहा है. संगम में फीकल कोलिफोर्म बैक्टीरिया (FC) भयावह स्तर पर पहुंच गया है, जो नदी में मल की वजह से बनता है. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार संगम में मल बैक्टीरिया यानी फीकल कोलीफोर्म (एफसी) की तय सीमा 5-13 गुना अधिक है और 50 फीसदी पानी अशुद्ध हो चुका है. लिहाजा संगम में डुबकी लगाना हानिकारक हो सकता है. एफसी बैक्टीरिया सीवर से आता है. इसकी निर्धारित सीमा प्रति 100 मिली लीटर एफसी 500 है, जो बढ़कर 2500 तक पहुंच चुकी है. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़े के अनुसार यूपी के 16 स्टेशन पर 50 फीसदी से अधिक जगहों पर तय सीमा से अधिक फीकल कोलीफोर्म पाया गया है. सबसे अधिक प्रदूषण वाली जगहें कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी हैं. कानपुर के जाजामऊ पंपिंग स्टेशन पर 2017 मे एफसी लेवल 10-23 गुना अधिक है. वाराणसी के मालवीय ब्रिज में एफसी लेवल 13-19 गुना अधिक है. 2017 के आंकड़े के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि पांच राज्यों में गंगा नदी में प्रदूषण की स्थिति ज्यादा भयावह है, जिनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here