सांसद रहते हुए भी वकालत कर सकेंगे नेता, बार काउंसिल ने दी इजाजत

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सांसद या विधायक रहते हुए कोर्ट में वकालत करने वालों नेताओं को बार काउंसिल ऑफ इंडिया से राहत मिली है. बार काउंसिल की मीटिंग में वकील सांसदों को प्रैक्टिस करने की इजाजत दे दी गई है. हालांकि, इसके साथ एक शर्त भी लगाई गई है. काउंसिल ने अपने आदेश में कहा है कि अगर ऐसे कोई सांसद किसी जज के खिलाफ महाभियोग लाने में शामिल होते हैं, तो उन्हें उस कोर्ट में वकालत करने की अनुमित नहीं दी जाएगी. काउंसिल के इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रही कांग्रेस के प्रस्ताव पर ऐसे सांसद हस्ताक्षर नहीं कर पाएंगे, जो कोर्ट में वकालत भी करते हों. इसका मतलब ये हुआ कि कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी महाभियोग की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे. दरअसल, बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी कि ऐसे सांसदों और विधायकों की कोर्ट प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाए. उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 49 का हवाला देते हुए ऐसे नेताओं की कोर्ट प्रैक्टिस को असंवैधानिक बताया था. बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, अभिषेक मनु सिंघवी, पी. चिदंबरम समेत बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद और सांसद मीनाक्षी लेखी जैसे बड़े नेता कोर्ट प्रैक्टिस भी करते रहे हैं.

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