पेपर लीक: दिल्ली हाईकोर्ट ने CBSE को दिया नोटिस, 10 दिन में मांगा जवाब

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पेपर लीक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीएसई, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 10 दिन में जवाब मांगा है. दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीएसई से नाराज़ होते हुए पूछा कि 10वीं और 12वीं की दोबारा परीक्षा को लेकर 2 महीने का वक़्त क्यों लग रहा है. दिल्ली हाईकोर्ट ने पेपर लीक मामले में एक जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए कहा कि जल्द री-एग्जाम कराने का फ़ैसला क्यों नहीं लिया जा रहा है. कोर्ट ने कहा, बच्चों को ये जानने का अधिकार है कि 10वीं के एग्जाम के बाद वो आगे क्या करेगा. कोर्ट ने सवाल किया कि आप कोर्ट को सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप कुछ ऐसा सिस्टम बनाएंगे की दोबारा पेपर लीक न हो? मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी. ANI ✔ @ANI Delhi High Court issued notice to CBSE, Delhi Police and HRD ministry on a PIL seeking 10th Maths paper be preferably held earlier and also seeking court monitored probe into #CBSEPaperLeak . Next date of hearing is 16th March 1:32 PM – Apr 2, 2018 61 24 people are talking about this Twitter Ads info and privacy CBSE री-एग्जाम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं के गणित विषय के प्रश्न-पत्र लीक होने पर बोर्ड द्वारा उसकी दोबारा परीक्षा कराने के फैसले को केरल के एक छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. छात्र ने प्रश्न-पत्र के मात्र दिल्ली में ही लीक होने की खबरों के बाद याचिका दायर की. कोच्चि में चॉइस स्कूल के छात्र रोहन मैथ्यू ने तर्क दिया है कि पुनर्परीक्षा का फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 (कानूनी समानता), अनुच्छेद 21 (जीवन और आजादी का अधिकार) और अनुच्छेद 21ए (शिक्षा का अधिकार) का उल्लंघन कर मनमाने और अवैध तरीके से लिया गया है. उन्होंने याचिका में सीबीएसई को 28 मार्च को हुई 10वीं की गणित की परीक्षा का मूल्यांकन कर 10वीं का परिणाम घोषित करने का निर्देश देने का आग्रह किया है. मैथ्यू ने कहा है कि पुनर्परीक्षा के तथ्यों और परिस्थितियों की समीक्षा करने के लिए एक विशेष उच्चाधिकार समिति गठित की जानी चाहिए. छात्र ने केरल उच्च न्यायालय में वकालत करने वाले अपने पिता के माध्यम से याचिका दायर करते हुए कहा है कि 16 लाख परीक्षार्थियों के भविष्य को खतरे में डालने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.

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