संसद के अंदर और बाहर हंगामा, दोनों सदन पूरे दिन के लिए स्थगित

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संसद का बजट सत्र सोमवार को चार दिन के ब्रेक के बाद शुरू हुआ लेकिन हंगामे की वजह से कोई कामकाज नहीं हो सका. संसद के दोनों सदनों को पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा. लोकसभा में कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद हंगामा शुरू हो गया. बता दें कि संसद के बजट सत्र का अधिकतर हिस्सा हंगामे की भेंट चढ़ गया. इस सत्र में सबसे ज्यादा हंगामा आंध्र प्रदेश के सांसदों ने अपने राज्य के लिए अलग विशेष पैकेज की मांग को लेकर किया. हंगामा करने वालों में तेलुगु देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस, दोनों ही दलों के सदस्य बढ़चढ़ कर आगे रहे. सोमवार को लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने संसद की कार्यवाही ना चलने देने के लिए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया. अनंत कुमार ने कहा कि सरकार लगातार यह कह रही है कि वह अविश्वास प्रस्ताव से लेकर हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन कांग्रेस के रुख की वजह से संसद नहीं चल पा रही है. ना सिर्फ सदन के अंदर बल्कि बाहर संसद भवन परिसर में भी तीन अलग-अलग पार्टियों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया. तेलुगु देशम पार्टी सांसदों ने आंध्र प्रदेश को स्पेशल स्टेटस दिए जाने की मांग को लेकर महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास बैनर लेकर प्रदर्शन किया. ये सांसद नारे लगा रहे थे कि आंध्र प्रदेश के साथ न्याय होना चाहिए, राज्य को विशेष दर्जा दिया जाना चाहिए. वहीं, तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले एआईडीएमके सांसदों ने अलग से प्रदर्शन कर कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड के गठन की मांग की. एआईडीएमके सांसद भी हाथ में बैनर पोस्टर लिए हुए थे. इस पार्टी के सांसद पिछले कई दिनों से संसद के भीतर और बाहर कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड के गठन की मांग उठाते रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने भी सोमवार को संसद भवन के मेन गेट पर ‘एयर इंडिया’ के निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया. इस पार्टी के सांसदों ने कहा कि केंद्र सरकार को ‘एयर इंडिया’ को बेचना नहीं चाहिए. तृणमूल कांग्रेस के सांसद इस मौके पर नारे भी लगा रहे थे कि ‘देश की नेता कैसी हो ममता बनर्जी जैसी हो.’ संसद का बजट सत्र 6 अप्रैल को खत्म हो रहा है और संसद के अब सिर्फ 4 दिन बचे हैं लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के रुख को देखकर ऐसा लगता नहीं कि बाकी बचे दिनों में भी संसद में कोई काम-काज हो पाएगा. सरकार के पास तीन तलाक समेत तमाम बिल पड़े हैं जिन्हें सरकार इस सत्र में पास कराना चाहती थी लेकिन अब ऐसा लगता नहीं कि इस सत्र में कोई कामकाज हो सकेगा.

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