… तो क्या सलमान खान को इसलिए मिलेगी जमानत?

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जिस बंदूक से जोधपुर के नज़दीक कांकाणी इलाके में एक और दो अक्तूबर 1998 की रात दो काले हिरणों का शिकार किया गया वो बंदूक किसकी थी? वो बंदूक उस रात किसके पास थी? उस बंदूक से उस रात किसने गोली चलाई थी? ज़ाहिर है जिसके पास बंदक थी और जिसने गोली चलाई वहीं गुनहगार है. अब अगर जोधपुर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को पढ़े तो उस रात बंदूक सलमान खान के पास थी और सलमान खान ने ही काले हिरण पर गोली चलाई. मगर राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच के 25 जुलाई 2016 के फैसले को पढ़े तो सलमान खान के पास उस रात कोई बंदूक ही नहीं थी. इसीलिए उन्हें आर्म्स एक्ट में रिहा भी कर दिया गया. क्या एक और दो अक्तूबर 1998 की दरम्यानी रात को सलमान ख़ान ने जोधपुर से 35 किलोमीटर दूर कांकणी इलाके में दो काले हिरणों का शिकार अकेले किया था? क्या सैफ अली खान, तब्बू, नीलम और सोनाली बेंद्रे बस जिप्सी में सिर्फ साथ बैठे थे? क्या दोनों हिरणों का शिकार गोली मार कर किया गया था? और क्या गोली सलमान खान ने चलाई थी? जिस बंदूक से जोधपुर के नज़दीक कांकाणी इलाके में एक और दो अक्तूबर 1998 की रात दो काले हिरणों का शिकार किया गया वो बंदूक किसकी थी? वो बंदूक उस रात किसके पास थी? उस बंदूक से उस रात किसने गोली चलाई थी? ज़ाहिर है जिसके पास बंदक थी और जिसने गोली चलाई वहीं गुनहगार है. अब अगर जोधपुर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को पढ़े तो उस रात बंदूक सलमान खान के पास थी और सलमान खान ने ही काले हिरण पर गोली चलाई. मगर राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच के 25 जुलाई 2016 के फैसले को पढ़े तो सलमान खान के पास उस रात कोई बंदूक ही नहीं थी. इसीलिए उन्हें आर्म्स एक्ट में रिहा भी कर दिया गया. क्या एक और दो अक्तूबर 1998 की दरम्यानी रात को सलमान ख़ान ने जोधपुर से 35 किलोमीटर दूर कांकणी इलाके में दो काले हिरणों का शिकार अकेले किया था? क्या सैफ अली खान, तब्बू, नीलम और सोनाली बेंद्रे बस जिप्सी में सिर्फ साथ बैठे थे? क्या दोनों हिरणों का शिकार गोली मार कर किया गया था? और क्या गोली सलमान खान ने चलाई थी? मगर जांच अधिकारी ने जिस बंदूक की बात की थी वो बंदूक ना तो उस जिप्सी से बरामद हुई जिसमें बैठ कर शिकार किया गया था ना ही उम्मेद भवन के उस कमरे से जहां सलमान या बाकी सितारे ठहरे थे. हालांकि वारदात के फौरन बाद अगली सुबह और फिर सात अक्तूबर 1998 को बाकायदा वन विभाग ने जिप्सी की तलाशी भी ली थी मगर मिला कुछ नहीं. बल्कि बाद में एक बंदूक सलमान के मुंबई के घर से जरूर बरामद हुई. इसके बाद शिकार के बारहवें दिन यानी 12 अक्तूबर 1998 को दोबारा तलाशी लेने पर वन विभाग ने शिकार में इस्तेमाल जिप्सी से प्वाइंट टू रिवाल्वर और प्वाइंट टू रायफल के छर्रे और खोखे मिलने के दावे जरूर किए. पर वो सारे छर्रे और खोखे बिल्कुल नए थे. जबकि 12 दिन तक जिप्सी में पड़े रहने और बारिश के बाद उसमें ज़ंग लग जाना चाहिए था. पर ऐसा हुआ नहीं. इतना ही नहीं बाद में फॉरेंसिक जांच से पता चला कि जिन छर्रों और गोलियों से दोनों काले हिरण की मौत हुई है वो सलमान की बंदूक से चली ही नहीं थी. बल्कि गोली किसी और बंदूक से चली थी. पर वो कौन सी बंदूक थी ये आज तक नहीं पता. इन्हीं सब आधार पर जोधपुर सेशन कोर्ट ने 18 जनवरी 2017 को सलमान खान को आर्म्स एक्ट में बरी कर दिया था. मगर अब उसी मामलें में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने सलमान खान को दो काले हिरणों को गोली मारने का दोषी करार दिया है. लिहाज़ा कानून के जानकार ये सवाल उठा रहे हैं कि जब एक ही केस के एक मामले में सलमान बरी हो गए तो दूसरे में दोषी कैसे हो सकते हैं? सलमान के वकील ने सेशन कोर्ट में ज़मानत के लिए इस मुद्दे को सबसे ज्यादा प्रमुखता से उठाया है.

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