दोस्तपुर थाने की जर्जर इमारत,कभी भी हो सकती है हादसे का शिकार

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अज़ीम अहमद खान edit by[सलमान ख़ान]

राजनीतिक गलियारो, चुनावी मंचो से नेताओ, को बड़े बड़े भाषण देते सुना होगा,जब बात सामाजिक या समाज की रक्षा करने वाली पुलिस की आती है सरकार मे बैठे सभी लोगो की आंखो पर केंचुली चढ़ जाती है. प्रदेश मे जब योगी सरकार आयी तब पुलिस को अतिरिक्त शक्ति प्रदान की गयी. नतीजा ये हुआ। ताबड़तोड़ इनकोंटर हुये प्रदेश से गुंडो माफियाओ का सफाया हो गया.

जिस उत्तर प्रदेश पुलिस के डर से गुंडे माफिया आत्मसमर्पण करने लगे है या प्रदेश छोड़ पलायन कर चुके है.जिस पुलिस से असमाजिक तत्व थरथर काँप रहे है वही पुलिस डर के साये मे रहने को मजबूर है.

मामला सुल्तानपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दोस्तपुर थाने का है, थाने की हालत बहुत जर्जर और खस्ता हाल है कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. इस संबंध मे जब दिल्ली क्राइम व भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के पत्रकार अजीम अहमद खान ने थाना प्रभारी दोस्तपुर से जानकरी प्राप्त की तो मालूम हुआ सन 2013 मे जब बिल्डिंग का एक हिस्सा गिरा था उस हादसे मे 2 लोगो की मौत हुयी थी.

एक हादसा हो चुका है भवन जर्जर हालत मे गिरने की कगार पर खड़ा है मानसून सीज़न मे बारिश की वजह से इमारत गिर सकती है.आखिर सरकार कब नींद से जागेगी. हजारो करोड़ों रुपये विज्ञापन पर खर्च करने वाली सरकारें आखिर कब मूल भूत सुविधा देंगी पुलिस को?

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